नक्कारखाना

.. तूती भी बोलती है ।

जला के रखो

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आग थोड़ी सी बची है जो, जला के रखो
बुझेगी तो धुएँ का गुबार फूटेगा.
आज हमने अगर मशाल नहीं थामी तो
कल को िफर से अंधेरा बहार लूटेगा.


‘अजीब’ सुधांशु
Jun, 2007

Written by Sudhanshu

December 15, 2007 at 7:19 pm

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