गुलाल के रंग
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं
ओ रे बिस्मिल काश आते आज तुम हिन्दुस्तान
देखते की मुल्क सारा यूँ टशन में, थ्रिल में है
आज का लौंडा ये कहता हम तो बिस्मिल थक गए
अपनी आज़ादी तो भैय्या लौंडिया के दिल में हैं
आज के जलसों में बिस्मिल एक गूंगा गा रहा
औ बहरों का वो रेला नाचता महफिल में है
हाथ की खादी बनाने का ज़माना लद गया
आज तो चड्ढी भी सिलती इंग्लिशों के मिल में है
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं !!
इस मुल्क ने हर शख्स को जो काम था सौंपा , उस शख्स ने उस काम माचिस जला के छोड़ दी |
