नक्कारखाना

.. तूती भी बोलती है ।

Archive for the ‘दूरदर्शन’ Category

ये सोच लो पहले

without comments

ये सोच लो पहले अजमाने कितने लगे इस आराइश-ए-चमन में.

प्यारा गुलशन अपना, सबका सुन्दर सपना.
क्या से क्या ये हो गया, जल रहा है आशियाँ
इतना कैसे बदला, किसने लूटीं खुशियाँ
भीगी क्यों है अँखियाँ.

प्यारा गुलशन अपना, सबका सुन्दर सपना.
ये क्या हुआ.
दरगाह क्यों जलाई, ये खून क्यों बहाया
अस्मत को क्यों लुटाया.
कैसे हुआ.
गोली को क्यों बनाया
सदियों की दोस्ती को पल भर में क्यों मिटाया.
दुश्मनों की बात में आके, दोस्ती के रिश्ते भुलाके,
खुद का घर जला दिया, हाय हमने ये क्या किया?

आजाद खयाली किसने कुचली है, अब तो तुम जागो.
किसने बनाया है ये मलहला, अब तो तुम जागो.

सरे जहाँ से अच्छा ये गुलसितां हमारा,
ये गुलशन हमको प्यारा है.

छुप-छुप के जीना, घुट-घुट के रोना
जीते-जी मरना.
गुमराह न तुम होना, सुख-शांति नहीं खोना.

झेलम की लहरें कहती हैं, उम्मीद अभी तो बाकी है,
ये रात कभी तो बीतेगी, वो सुबह कभी तो आयेगी.

प्यारा गुलशन अपना, सबका सुन्दर सपना.

मंजिलों का रास्ता, देख ले जानम ज़रा, जाने ना.
आ SSSSS
मेरे जाने-जिगर तेरी गम से भरी जिंदगी भी बदल जाएगी.

प्यार की धुन में नाचेंगे.
धूम मचा के नाचेंगे.

सर उठा के जीना है, अब नहीं किसी से डरना है.
ये वतन सदा खुशहाल रहे, साडी दुनिया में जन्नत ये अपनी.

प्यारा गुलशन अपना, सबका सुन्दर सपना.

Written by Sudhanshu

December 16, 2007 at 3:03 am

कहे समय का इकतारा

without comments

कहे समय का इकतारा
अक्षर अक्षर दीप जले
फैले शिक्षा का उजियारा
कहे समय का इकतारा
तनननना तनननना तनननना तानाननना

पढ़ लिख लिख पढ़ बन होशियार
समझ बढे तो बढे विचार
बड़ा ज्ञान से न धन दूजा
करती दुनिया ज्ञान की पूजा
शिक्षा है अनमोल रतन
पढ़ने का सब करो जतन.. ये.. ये..
कहे समय का इकतारा

Written by Sudhanshu

December 16, 2007 at 2:52 am

इक जरा सी बात

without comments

कभी सपने पूरे कर गई
काँटों कि चुभन कभी भर गई
कभी आँखों में इसने आँसू दिए
कभी खुशियों के सौगात
वो ही जाने जिसके मन में
प्यार भरे जज्बात
जीवन सारा बदले पल में
इक जरा सी बात


DD1 serial ‘इक जरा सी बात’

Written by Sudhanshu

December 16, 2007 at 1:45 am

एहसास

without comments

दिल से एहसास की दौलत को लगा कर रखना
इस कड़ी धूप में इक छाँव बचा कर रखना


DD1 serial ‘एहसास’

Written by Sudhanshu

December 16, 2007 at 1:41 am