नक्कारखाना

.. तूती भी बोलती है ।

Archive for the ‘मुक्तक’ Category

जब नाव जल में छोड़ दी

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जब नाव जल में छोड़ दी
तूफान ही में मोड़ दी
दे दी चुनौती सिंधु को
फिर धार क्या मझधार क्या

?

Written by Sudhanshu

December 16, 2007 at 3:15 am

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वतन बेचते हैं

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अमन चोरों को देखो अमन बेचते हैं
कफ़न चोरों को देखो कफ़न बेचते हैं
रखवाला जिसे बनाया देश का
वो दिल्ली में बैठे वतन बेचते हैं

?

Written by Sudhanshu

December 16, 2007 at 3:14 am

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रफू

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रफू की ताकीद करने वाले
कहाँ-कहाँ से रफू करोगे
लिबास-ए-हस्ती का हल ये है
जगह-जगह से मसक रहा है

?

Written by Sudhanshu

December 16, 2007 at 3:11 am

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वायदे

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रोज गिर जाती है दीवार तेरे वायदों की
रोज हम वक्त के साये में रहा करते हैं
तू लाख प्यार के मंतर पढता रह ऐ दोस्त
जिनकी फितरत में हो डंसना वे डंसा करते हैं

?

Written by Sudhanshu

December 16, 2007 at 2:38 am

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