Archive for the ‘मुक्तक’ Category
जब नाव जल में छोड़ दी
जब नाव जल में छोड़ दी
तूफान ही में मोड़ दी
दे दी चुनौती सिंधु को
फिर धार क्या मझधार क्या
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वतन बेचते हैं
अमन चोरों को देखो अमन बेचते हैं
कफ़न चोरों को देखो कफ़न बेचते हैं
रखवाला जिसे बनाया देश का
वो दिल्ली में बैठे वतन बेचते हैं
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रफू
रफू की ताकीद करने वाले
कहाँ-कहाँ से रफू करोगे
लिबास-ए-हस्ती का हल ये है
जगह-जगह से मसक रहा है
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वायदे
रोज गिर जाती है दीवार तेरे वायदों की
रोज हम वक्त के साये में रहा करते हैं
तू लाख प्यार के मंतर पढता रह ऐ दोस्त
जिनकी फितरत में हो डंसना वे डंसा करते हैं
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