मेरी खामोशियों में भी फसाना ढूंढ लेती है

मेरी खामोशियों में भी फसाना ढूंढ लेती है
बड़ी शातिर है ये दुनिया बहाना ढूंढ लेती है

हकीकत जिद किए बैठी है चकनाचूर करने को
मगर हर आंख फिर सपना सुहाना ढूंढ लेती है

न चिडि़या की कमाई है न कारोबार है कोई
वो केवल हौसले से आबोदाना ढूंढ लेती है

समझ पाई न दुनिया मस्लहत मंसूर की अब तक
जो सूली पर भी हंसना मुस्कुराना ढूंढ लेती है

उठाती है जो खतरा हर कदम पर डूब जाने का
वही कोशिश समन्दर में खजाना ढूंढ लेती है

????? (searching for the writer and more of his writings.)

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2 thoughts on “मेरी खामोशियों में भी फसाना ढूंढ लेती है

  1. उठाती है जो खतरा हर कदम पर डूब जाने का
    वही कोशिश समन्दर में खजाना ढूंढ लेती है

    behtarin,aaj ke zindagi ko behad acchi tarah se varnan kiya hai apne.

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