ये सोच लो पहले

ये सोच लो पहले अजमाने कितने लगे इस आराइश-ए-चमन में.

प्यारा गुलशन अपना, सबका सुन्दर सपना.
क्या से क्या ये हो गया, जल रहा है आशियाँ
इतना कैसे बदला, किसने लूटीं खुशियाँ
भीगी क्यों है अँखियाँ.

प्यारा गुलशन अपना, सबका सुन्दर सपना.
ये क्या हुआ.
दरगाह क्यों जलाई, ये खून क्यों बहाया
अस्मत को क्यों लुटाया.
कैसे हुआ.
गोली को क्यों बनाया
सदियों की दोस्ती को पल भर में क्यों मिटाया.
दुश्मनों की बात में आके, दोस्ती के रिश्ते भुलाके,
खुद का घर जला दिया, हाय हमने ये क्या किया?

आजाद खयाली किसने कुचली है, अब तो तुम जागो.
किसने बनाया है ये मलहला, अब तो तुम जागो.

सरे जहाँ से अच्छा ये गुलसितां हमारा,
ये गुलशन हमको प्यारा है.

छुप-छुप के जीना, घुट-घुट के रोना
जीते-जी मरना.
गुमराह न तुम होना, सुख-शांति नहीं खोना.

झेलम की लहरें कहती हैं, उम्मीद अभी तो बाकी है,
ये रात कभी तो बीतेगी, वो सुबह कभी तो आयेगी.

प्यारा गुलशन अपना, सबका सुन्दर सपना.

मंजिलों का रास्ता, देख ले जानम ज़रा, जाने ना.
आ SSSSS
मेरे जाने-जिगर तेरी गम से भरी जिंदगी भी बदल जाएगी.

प्यार की धुन में नाचेंगे.
धूम मचा के नाचेंगे.

सर उठा के जीना है, अब नहीं किसी से डरना है.
ये वतन सदा खुशहाल रहे, साडी दुनिया में जन्नत ये अपनी.

प्यारा गुलशन अपना, सबका सुन्दर सपना.

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