once upon a time in mumbaai!

These dialogues are going to be a cult soon. My definite favorites.
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धमाकों की आवाज में दफ़न है बम्बई और इस सबकी वजह मैं हूँ.
एक आदमी की बुनियाद हिलाने चला था, पूरा शहर हिल गया है.

तो खुद क्या खायेगा? –> दुआ. आपकी दुआ खाऊँगा.

जब दोस्त बना के काम हो सकता है पैट्रिक तो फिर दुश्मन क्यूँ बनायें?

लेकिन ये सब होगा कैसे? जैसे तू हुआ था. ऊपर वाले की दुआ से. थोड़ी मेहनत से. और बहुत सारी लगन से.

काम अभी पूरा नहीं हुआ है वर्धन.
तू दिलेर भी है और दरियादिल भी. तेरा नाम सबसे ऊपर होगा सुल्तान.

सोच लो. बात यहीं खतम करनी है या कहानी शुरू.
लो काट लो एक दूसरे को. हम सब आपस में लड़ेंगे तो सिर्फ पुलिस का काम आसान होगा.
सुना है आप बहुत तेजदार अंग्रेजी बोलते हो.
शहर के कमिश्नर तो हमी लोग है.

धंधे के लिए मुझे जमीं की जरूरत नहीं. समंदर हैं ना मेरे पास.

जिन्दा थे वो लोग जिनमे हालात बदलने की हिम्मत थी.

जो अपनी माँ की इज्जत नहीं करते मैं उनका बाप बनके आता हूँ. नाम याद रखना.

पैंट पेहेनना शुरू नहीं किया. और चोरी करना चालू? –> निकर में भागने में आसानी होती है ना?

मुझे अंदर करके कौन सा मेडल मिलेगा तुझे. आधे सिक्के रख, दो तीन झापड मार और बात खत्म कर.
तू बड़ा है ना तेरे में जोर ज्यादा है. जैसे जैसे मेरा उमर बढ़ता जायेगा तेरा घटता जायेगा. मेरा जोर बढ़ता जायेगा और तेरा घटता जायेगा. तब देखना.
ना तेरी आँखों में शर्म है ना माफ़ी. ऑंखें नीची कर.
५ और सूद के साथ ६. (आँख मारकर)

बचपन में काम करती थी तो लगता था सब खेल है. और अब काम कर रही हूँ क्यूंकि खेलने कि उम्र नहीं रही.

ये बड़ा है. ये तो महंगा होगा? –> कोई भी उठा लो साब सभी ४ आने के हैं.
सोच ये दुनिया का आखिरी अमरुद है. इसके बाद कोई और अमरुद नहीं उगेगा. फिर इसकी कीमत क्या होगी? –> ४ रुपये.
अच्छा सोच मुमताज ने ये अमरुद खुद अपने हाथों से उगाया था. सलीम के हाथ में फूल नहीं ये अमरुद रहता था. अब ये कितने का है? –> ४० रुपये
अबे यार सोच आदम ने सबसे पहले सेब नहीं अमरुद खाया था. अब ये कितने का है? –> ४०० रुपये

ज्यादा छुई मुई बनने कि जरूरत नहीं है. खुली किताब हो. एक दो पन्ने हम पढ़ लेंगे तो क्या फरक पड जायेगा.
पूरे ४०० रुपये का ख़रीदा है. महंगा कुछ नहीं मिला तो सस्ते को ही महंगा खरीद लिया.
अरे देखो भाई देखो. रेहाना जी के चाहने वाले उनके लिए ४०० रुपये का पेरू ले के आये हैं?
जिनकी मंजिल एक होती है वो रास्तों पर ही तो मिलते हैं.
मैं दिल लगा रहा हूँ. तू जुबान लड़ा रहा है.
हँसता है तो लगता है कुत्ता हांफ रहा है. हंस के दिखा. हंस. हंस.

यकीं नहीं हो रहा लेकिन यकीं था कि आप जरूर आयेंगी.
आपको कहा तो था कि आपकी पसंद कि जगह पे इन्तेजार करूँगा.
और हाँ, आज करेला आर्डर कीजिये मुझे वो भी बहुत पसंद है.
आज भी आप किसी की कहानी सुनने आई हैं या फिर हमारी कहानी आगे बढ़ेगी?
बेसबर आदमी जबान भी जला लेता है खाने का मजा भी नहीं ले पाता.
ऐसा क्यूँ? –> पता नहीं.
मैंने हमेशा आपको टिकेट ले के देखा है. आज सामने बैठी हैं तो देखना चाहता हूँ कि ये सच है या सपना.

मैंने सुना है कि दो लोग मिल के घर बना लेते हैं. आज जश्न नहीं मन सकते?
रंगों से परहेज नहीं. काले से बैर.
बस वो काला कोयला मेरी रग रग में बस गया. यहाँ तक कि ऑंखें खुली रखो तो आंसू भी काले. और बंद करो तो सपने भी काले. तबसे इन आँखों को आराम नहीं.
मिर्जा जी ये अपनी मर्जी से नहीं चलती. आपकी नब्ज के हिसाब से चलेगी.
ये नब्ज के हिसाब से चलेगी तो ठीक है. नब्ज इसके हिसाब से चलने लगी तो..

आज पहली बार सही रास्ते पर मिले हो.
आज का काम कल पर छोडूंगा तो आज बुरा मान जायेगा.

तुझे ये हार समझ में नहीं आ रहा है और मुझे तू. चल निकल यहाँ से.
तुम कभी नहीं सुधरोगे. ये उम्र सुधरने कि नहीं बिगड़ने कि है.
मुश्किल तो ये है कि मैं अभी ठीक तरह से बिगड़ा भी नहीं और तुमने सुधारना शुरू कर दिया?
हाथ छोडो मेरा. हमने छोड़ दिया तो कहाँ जाओगे?
शाम तक रुकुंगा तो सुबह बुरा मान जायेगी.

बाकी सब छुप के कम करते हैं. और सुलतान के बारे में रोज अख़बारों में छपता है.
जुर्म के रास्ते कितने ही मखमली क्यूँ ना हों सर खतम तो जेल के कम्बल में ही होते हैं.
गाड़ी चाहे कितनी भी तेज हो सर उसे रोकने के लिए एक कील काफी है.

किसने कट बोला? पहले आप कट बोलते हो फिर दिरेक्ट करते हो. आखिर आप हो कौन?
यहाँ रुबाब दिखने से क्या फायदा. ये मिजाज सुल्तान मिर्जा के सामने दिखाओ तो जाने.
मुझे यकीं है कि मेरा मिजाज और मेरा मेसेज सुलतान के पास पहुच जायेगा.

इंसान कि दुखती रग उसकी हर ताकत से बढ़कर होती है.
ये फोटो मत छापिएगा. वरना सबको पता चल जायेगा कि इस इंस्पेक्टर ने मेरा पीछा छोड़ने के लिए रिश्वत ली है.

बेटा कैसा है? महंगाई के साथ साथ वो भी तेजी से बढ़ रहा है.

क्यूँ आ गई अकल ठिकाने? –> अपनी अकल देखी ताला खुला छोड़ दिया.

गरमजोशी अच्छी चीज है. लेकिन अगर हद से बढ़ जाये तो खुद को जला देती है.
बरफ कि तरह ठंडा रहके भी क्या फायदा साब. थोड़ी देर अकडे फिर पिघल गए.
जो खुद नहीं पिघलते उन्ही को पिघलने के लिए ही कानून बना है.
कानून तो मुझे अपने बाप जैसा ही लगता है. कमजोर लाचार गरीब.
यही है आपका कानून. एक तमाचा चार बात एक रात हवालात.
एक मशवरा है. अगर किसी चीज कि लत बन जाये तो वो लत आदमी कि पहचान बन जाती है.
पहचान ही तो बनानी है ना साब. इस शहर में और करना ही क्या है?
चाहे वो रास्ता गलत ही क्यूँ ना हो? रस्ते कि परवाह करूँगा तो मंजिल बुरा मान जायेगी.

मेरा बेटा हाथ से निकल गया है. कल खुद मैंने उसको जेल में बंद किया है.

अपना और इसका चालू है भाई.

क्या खान. १८ साल में तुने कभी प्रसाद नहीं खाया और आज भगवान ही बदल लिया.
हमारी तस्वीरें खीच के अपनी दुकान में लगा लेना शोएब, कभी जरूरत पड़े तो दोनों में से एक को भगवान चुन लेना.

तेरे लिए गिफ्ट भी लेके आया हूँ. चकना भी लेके आया हूँ.
केक या पस्ट्री नहीं लेके आ सकते थे. वो तो जन्मदिन में खाते हैं ना.
कभी लड़कियों जैसी खुशी माने नहीं न मैंने. जिन गलों को चूमना था उन्ही को ही गीला कर दिया.
दूसरे गाल पे मार. क्या प्यार में हल्का हल्का मारती है. जोर से मार ना.
जो मौका छोड़ दे वो कैसा मर्द.

दिल्ली से बॉम्बे क्या मैं ये सुनाने आया हूँ कि मैं अपने ही देश में खुला नहीं घूम सकता.
आई ऍम सॉरी टू से सर. ये बात आप पोलिटिशियंस ने पहले सोच ली होती तो ये नौबत ही नहीं आती.

कोई कुछ नहीं बोल रहा सब घूरे जा रहे हैं.
सरकार खुद चल के तुम्हारे पास आ\ई है. सुन लो क्या कह रहे हैं.
पोलिटिक्स में आ जाओ. अगर हमारा कैबिनेट पोलिटिक्स में आ गया तो आपका कैबिनेट कहा जायेगा.

नया नया मुल्ला अल्ला अल्ला बहुत करता है.
बात सिर्फ पैसे कि नहीं है. इस खेल में जो पॉवर है उसका मजा ही कुछ और है.
सारी दुनिया राख कि तरह नीचे और खुद धुंए कि तरफ ऊपर.

ये ही है वो. –> हाँ.
कहा था ना मैंने. चोर कही का. –> हाँ.
तुझे चोरी का हार दिया इसने. –> हाँ.
हमें बांध कर गया था और चोरी कर गया था. –> हाँ.
अरे क्या हाँ हाँ कर रहे हो आप.

शेर से हल चलवाओगे तो किसान तो मरेगा ही.
तुझे क्या लगता है कि ये धंधा आम का बाघ है. कि चार पत्थर जेब में डाले और घुस गए.
कोई धंधा आदमी कि हिम्मत से बड़ा नही होता. हिम्मत बताई नहीं दिखाई जाती है.
कश्ती लहेरों से टकराएगी तो ही किनारे नसीब होगी.
आगे से तू सिर्फ वही कहेगा जो मैं सुनना चाहता हूँ.
ये आदमी टेढा लगता है मुझे. सीधे लोगों का हमारे धंधे में क्या काम.
इसे जिंदगी से ज्यादा अपनी जीत प्यारी है.

गुफा में अँधेरा कितना ही हो खान. किनारे पे रौशनी जरूर होती है.

कोयले कि खान में मशाल से रौशनी करने चला था. चरों तरफ आग लग गई.

एक मिनट में या तो बाजी पलट जाती है या खेलने वाला.

जो अपने बीते हुए कल से भागता है वो जिंदगी कि रेस कभी नहीं जीतता.
इंसान को वक्त के साथ बदलना चाहिए. वक्त भी कहाँ बदलता है. सिर्फ गुजरता है.

खाना कैसा है. गरम. तेरी तरह. नमकीन और तीखा, तेरी तरह.
लड़कियों कि यही आदत तो बुरी है. सच कहो तो कहती हैं बना रहे हो. और बनाओ तो उसे सच मान लेती हैं.
इस घर में २इन१ है फोन है. कितने घरों में होता हिया. क्या है ये सब. तरक्की.

इन बड़े लोगो के बीच बहुत अजीब लग रहा है.
आज ये लोग रिटर्न गिफ्ट के बिना नहीं जायेंगे.
तेरा नक्शा अच्छा है. दिखना चाहिए.
आते ही शुरू हो गए. –> तो मैं क्या कोई टेंट कुर्सी वाला हूँ जो सब लोगों के जाने के बाद पिऊँगा.
थोडा थोडा. उनका स्टाइल पसंद है मुझे.
जब मेरे बुलाने पे आए हैं. तो मेरे बोलने पे जायेंगे भी.

मेयर होते हुए भी स्मगलर कि पार्टी से आप रहे हैं और मुझे बदतमीज कह रहे हैं.
आज पहली बार बाप की वर्दी काम आई है.

तुम काम हाथ में लो. और वो पूरा ना हो. ये बात मैं नहीं मान सकता.
मैं उन चीजों कि स्मगलिंग करता हूँ जिनकी इजाजत सरकार नहीं देती है. उन चीजों कि नहीं जिनकी इजाजत जमीर नहीं देता.

जब घोडा लंगड़ा हो जाये तो सब जानते हैं उसके साथ क्या करना चाहिए.

अबे साले ऐम्बुलेंस में सोना लेके जाता है और गाड़ी में मरीज. पुलिस को बेवक़ूफ़ समझता है.

फ़िक्र है तो सिर्फ इस बात की कि बम्बई का दिल बहुत बड़ा है. डर है कही कोई इसे तोड़ ना दे.

मैं जो कुछ भी हूँ अपने धंधे कि वजह से नहीं. अपने फैसलों कि वजह से हूँ.
मैं अपनी जिंदगी का तरीका बदलने जा रहा हूँ तेवर नहीं.

ये बेचारी इतना नहीं नाची होगी जब इसमें शराब थी.
जबतक नाल और नकेल नहीं लगती हर घोडा खच्चर ही लगता है.
कान से नहीं दिमाग से सुन.
ना ही ये विरासत है ना ही खैरात.
कोशिश करूँगा इस बार शिकायत का मौका ना दूं. –> मौका मिलेगा भी नहीं.

अब सुपारी ली है तो चूना नहीं लगओंगा.

एक दिन जब ये बिल्ली पंजा मारेगी ना अंदर जो गंजा बैठा है बिल ढूँढता फिरेगा.

वक्त तेजी से बदल रहा है. अगर धंधा शांति से करना है तो धमाके तो करने ही पड़ेंगे.

आपके खर्राटे भी आपके भाषण कि तरह है. लंबे लंबे.
क्या बद्तमीजी है ये. मेरा मतलब है कि क्या चाहिए तुम्हे.
जब से होश संभाला है मैंने काम ही वही किया है जिसकी अनुमति सरकार नहीं देती.

इन सालों के पब्लिसिटी एजेंट बनके रह गए हैं.
अब जब दो ट्रेन एक ही पटरी पर आमने सामने होंगी तो टक्कर तो होगी ही.
हाँ नुकसान भी उसी का ज्यादा होगा जो पुरानी हो चुकी है,
मुझे ट्रेन कि परवाह नहीं है. मुझे पटरियां साफ़ चाहिए.

चिपक के रहना हेरोइन बना दूंगा.

बचपन में मुझपे हाथ उठाके मुझे अपने खिलाफ कर दिया था. अब ना तो मैं बच्चा हूँ और ना ही वो मेरा बाप.
ये धंधा स्पीकर कि आवाज से नहीं घोड़े कि आवाज से चलेगा.
तुम्हारी सवाल का जवाब दे दिया तो तुम्हारा सवाल बुरा मान जायेगा.

वक्त से हाथ नहीं मिलाया तो बाद में हाथ मसलतअ राह जायेगा.

आदमी हालात बिगड़ने के लिए बुरे काम नहीं करता. हालात सुधरने के लिए करता है.
लाउड स्पीकर कि आवाज सुनकर आजतक कभी अमीरों ने जमघट नहीं लगाया. हमेशा गरीब ही दौड़े चले आते हैं. ये सोचकर कि कुछ उनके फायदे कि बात होगी. मगर आजतक कुछ नहीं हुआ. वो बोलकर चुप हो गए और हम चिल्लाते राह गए.
गुलाम हम हमेशा से थे. पहले अंग्रेजों के अब गरीबी के.
हर किताब कि किस्मत में लायब्रेरी नहीं होती. कुछ कबाड़ी कि दूकान पे भी मिलती हैं.

हर कोई गलत काम ना करे इसलिए किसी ना किसी को तो सुल्तान मिर्जा बनना ही पड़ता है.

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