once upon a time in mumbaai!

These dialogues are going to be a cult soon. My definite favorites.
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धमाकों की आवाज में दफ़न है बम्बई और इस सबकी वजह मैं हूँ.
एक आदमी की बुनियाद हिलाने चला था, पूरा शहर हिल गया है.

तो खुद क्या खायेगा? –> दुआ. आपकी दुआ खाऊँगा.

जब दोस्त बना के काम हो सकता है पैट्रिक तो फिर दुश्मन क्यूँ बनायें?

लेकिन ये सब होगा कैसे? जैसे तू हुआ था. ऊपर वाले की दुआ से. थोड़ी मेहनत से. और बहुत सारी लगन से.

काम अभी पूरा नहीं हुआ है वर्धन.
तू दिलेर भी है और दरियादिल भी. तेरा नाम सबसे ऊपर होगा सुल्तान.

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उसने कहा था

न किसी की आँख का नूर हूँ न किसी के दिल का क़रार हूँ
जो किसी के काम न आ सके मैं वो एक मुश्त-ए-ग़ुबार हूँ

न तो मैं किसी का हबीब हूँ न तो मैं किसी का रक़ीब हूँ
जो बिगड़ गया वो नसीब हूँ जो उजड़ गया वो दयार हूँ

मेरा रन्ग-रूप बिगड़ गया मेरा यार मुझ से बिछड़ गया
जो चमन फ़िज़ाँ में उजड़ गया मैं उसी की फ़स्ल-ए-बहार हूँ

पये फ़ातेहा कोई आये क्यूँ कोई चार फूल चड़ाये क्यूँ
कोई आके शम्मा जलाये क्यूँ मैं वो बेकसी का मज़ार हूँ

मैं नहीं हूँ नग़मा-ए-जाँफ़िशाँ मुझे सुन के कोई करेगा क्या
मैं बड़े बरोग की हूँ सदा मैन बड़े दुख की पुकार हूँ


बहादुर शाह जफ़र
(the moghul emperor)

फूल

अजी शिखर पर जो चढ़ना है तो कुछ संकट झेलो
चुभने दो-चार कांटें, फिर जी भर गुलाब से खेलो.

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जिसने मरना सीख लिया है जीने का अधिकार उसी को
जो काँटों के पथ पर आया फूलों का उपहार उसी को.

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वक्त को जिसने ना समझा उसे मिटना पड़ा है
बच गया तलवार से तो फूल से कटना पड़ा है.

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हिंद की विशेषता

एक राह के हैं मीत, मीत एक प्यार के
एक बाग के हैं फूल, फूल एक हार के
देखती है यह जमीन, आसमान देखता
अनेकता में एकता, ये हिंद की विशेषता.

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