पात्र परिचय – भाग २ (ताऊ)

“मोटा है पर प्यारा है, ताऊ तो हमारा है”, “भाऊ भाऊ, दम-दम ताऊ” टाइप के नारों से आप ये मत समझना की ताऊ कोई पॉलिटिशियन है. ताऊ पॉलिटिशियन नहीं अल्सेशियन है. अल्सेशियन पिल्ला. ये बात ताऊ को नागवार हो सकती है और शायद पढ़ने के बाद मुझपे गुस्सा भी हो जाये, पर बात बिलकुल सच है. वो एक अल्सेशियन पिल्ले की तरह पूरा फ्री entertainment package है. जैसे लोग किसी पिल्ले की तरफ खिचे चले आते हैं. सबसे ज्यादा सबसे शैतान और नटखट बच्चे आकर्षित होते हैं. ताऊ भी ऐसा ही है – दुनिया भर के विचित्र लोगों का collector. यूँ भी कह सकते हैं की उसके साथ आकर लोगों की विचित्रता सापेक्ष  रूप से बाहर आ जाती है. यहाँ तक की कभी अपने को ‘सामान्य’ समझने वाला मैं आजकल खुद को ‘अजीब’ कहने लगा हूँ (पहले मेरा pen name ‘सामान्य’ हुआ करता था. अब ‘अजीब’ है.)

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पात्र परिचय – भाग १ (गोगा)

हमारे एक दोस्त हैं – गोगा. मेरा ख्याल है कि पूजनीया आंटीश्री निश्चय ही सुनील शेट्टी और सनी देओल कि फैन रही होंगी. दोनों के vocal chords के sequential combination से जो ध्वनि उत्पन्न हो सकती है, हमारे प्रिय मित्र ने प्रथमत: हूबहू उसी का उच्चारण किया – गो गा. उनके माता पिता ने तो इसे मात्र एक incidental त्रुटि माना. वो तो हम जैसे कुछ मित्रहितवादी थे जिन्होंने उनकी इस खूबी को जाना माना पहचाना और ये थाना कि उनका हुनर पूरी दुनिया के सामने लायेंगे. इसके लिए उन्हें Great Expectations का पहला पन्ना पढाया गया, ‘I called myself Pip and came to be called as Pip’ से अवगत कराया गया, और ‘गोगा’ नाम दिलाया गया.


मिलि गै ज्ञान, नाम धरि गोगा,
पहिन के निकले करिया चोगा,
कामसूत अतुलित बल धामा,
लूट के आये एम्सटरडामा.